कर्मयोगी (लेखक : ईश्वर चन्द्र विद्यासागर)
"कर्मयोगी" एक प्रेरणादायक उपन्यास है, जिसे प्रसिद्ध समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने लिखा है। इस पुस्तक में उन्होंने महान सन्त स्वामी रामतीर्थ के जीवन को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। भारत, जो ऋषियों और मुनियों की भूमि रही है, ऐसे ही एक दिव्य व्यक्तित्व को यह पुस्तक समर्पित है।
मुख्य विषयवस्तु:
स्वामी रामतीर्थ ने एक सामान्य मनुष्य की तरह जीवन की शुरुआत की — वे विद्यालय और कॉलेज गए, अध्यापन कार्य किया, विवाह किया और पिता भी बने। लेकिन आध्यात्मिक मार्ग की ओर उनका झुकाव बचपन के गुरु धन्ना मल के सानिध्य में हुआ।
बाद में वे स्वामी विवेकानंद के संपर्क में आए और वेदांत के गहन ज्ञान में रुचि लेने लगे। उन्होंने देश-विदेश में वेदांत के प्रचार-प्रसार में स्वयं को समर्पित कर दिया। गणित के अध्यापक होते हुए भी वे वेदांत साहित्य में पूर्ण रूप से लीन हो गए।
स्वामी जी का जीवन दर्शन:
उन्होंने सांसारिक मोह, चमत्कारों और आडंबर से दूर रहकर एक साधना और सेवा-प्रधान जीवन जिया। उत्तराखंड के टिहरी और गढ़वाल की दुर्गम यात्रा कर उन्होंने अपनी आध्यात्मिक चेतना को और अधिक परिष्कृत किया। टिहरी नरेश उनके चिंतक रहे, और उनके शिष्य स्वामी नारायण व स्वामी पूरन उनके निकटतम रहे।
बच्चों के बड़े होने पर उन्होंने संन्यास आश्रम में प्रवेश कर लिया और एक सच्चे कर्मयोगी के रूप में आदर्श जीवन जिया।
निष्कर्ष:
"कर्मयोगी" न केवल स्वामी रामतीर्थ के जीवन का चित्रण है, बल्कि यह पाठकों को यह भी सिखाती है कि कैसे एक साधारण व्यक्ति भी कर्म, सेवा और तपस्या से महान बन सकता है। यह पुस्तक उन सभी के लिए प्रेरणास्रोत है जो जीवन को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं।






Nice review. Waiting for the next.