top of page

गुनाहों का देवता (लेखक : धर्मवीर भारती)

दीपक कुमार
Oct 6
1 min read

गुनाहों का देवता,एक ऐसा उपन्यास है,जिसे हम प्रेम कहानी के इतर भी देख सकते है। इस उपन्यास को वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसका मूल्य है 299 रूपए । कहानी मे सुधा और चन्दर के अलावा भी बहुत से मुद्दो पर लेखक ने अपनी अनुभवी लेखनी चलाई है। उपन्यास की समय सीमा 1959 के आसपास की है। ये वो समय था जब भारत आजादी के बाद ताजी हवा मे सांस ले रहा था। लडकियों के स्कुल जाने मे पाबन्दी थी और 13 वर्ष की उम्र मे विवाह कर दिया जाता है। ऐसे मे एक उच्चकुलीन ब्राह्मण परिवार अपनी एकमात्र बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना चहाता है,लेकिन समाज के दबाव मे उसकी महत्वकांक्षा का गला घोंट कर उसका विवाह कर देता है।


सुधा इस विवाह और अपने अरमान से ऐस् टूटती है कि फिर जुड ही नही पाती। सुधा उभरते भारत मे पढना चहाती,अपने पैरों पर खड़ा होना चहाती है,लेकिन सब बेकार।

उस समय हिन्दू-मुस्लिम प्रेम भी अपनी पराकाष्ठा पर था,ये सुधा और गेसू काजमी की दोस्ती से पता चलता है। उच्च शिक्षा,उच्च पद पाने के लिए चन्दर अपने गुरू की किस प्रकार सेवा करता है, ऐसा लक्ष्मण यादव करते तो उन्हे 'प्रोफेसर की डायरी' नहीं लिखनी पडती खैर उन्हे ऐसा गुरू इलाहाबाद मे ही मिल सकता था, दिल्ली के राजनीतिक माहौल मे नहीं।

ईसाई,सिक्ख, हिन्दू-मुस्लिम, सब सम्प्रदाय के सौहार्द पूर्ण वातावरण को उपन्यास मे प्रस्तुत किया है।



लेखक ने वातावरण, माहौल का ऐसा चित्रण किया है,सब सजीव हो उठा है। कहानी आज भी प्रासंगिक है। स्त्री-पुरुष सम्बन्ध के रूप को समझने के लिए दूसरी समीक्षा का इन्तजार करना होगा। जो आपकी डिमांड पर जल्द आयेगी।

 
 
 

2 Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
Guest
Oct 06
Rated 5 out of 5 stars.

wow, that was such a crisp and concise explanation of the GUNAHO KE DEVTA ✨🙏

Like

Guest
Oct 06
Rated 5 out of 5 stars.

Wonderful review ! Just keep sharing.

Like

अन्य पुस्तक समीक्षाएँ

bottom of page