भारत गांधी के बाद (दुनिया के विशालतम लोकतंत्र का इतिहास) लेखक : रामचन्द्र गुहा
देश के प्रख्यात इतिहासकार, शिक्षाविद और देहरादून निवासी रामचन्द्र गुहा की पुस्तक "भारत गांधी के बाद" स्वतंत्र भारत के इतिहास को अत्यंत रोचक, गहन और जीवंत शैली में प्रस्तुत करती है। पुस्तक पढ़ते समय पाठक के मन में एक साथ रोमांच, जिज्ञासा और कई बार आक्रोश भी उत्पन्न होता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो इतिहास स्वयं सजीव होकर अपने अनुभव और घटनाएँ हमारे सामने रख रहा हो।
लेखक ने पुस्तक को तीन भागों में विभाजित किया है—
1. और कारवाँ बनता गया
2. नेहरू का भारत
3. केन्द्र को झटका
पुस्तक का आरम्भ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या से होता है। इसके बाद लेखक तत्कालीन भारतीय गणराज्य की जटिल परिस्थितियों का सजीव चित्रण करते हुए कश्मीर की रक्तरंजित वादियों, पाकिस्तान और चीन से जुड़े संबंधों तथा अनेक राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों के माध्यम से पाठक को वर्तमान भारत की पृष्ठभूमि से परिचित कराते हैं। घटनाओं का क्रम इतना स्वाभाविक है कि पाठक बिना रुके इतिहास की यात्रा में आगे बढ़ता चला जाता है।
रामचन्द्र गुहा ने स्वतंत्र भारत के लगभग सत्रह वर्षों के राजनीतिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक विकास को जिस गहराई से प्रस्तुत किया है, वह अत्यंत प्रभावशाली है। लगभग 525 पृष्ठों की यह पुस्तक केवल घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के निर्माण, उसके संघर्षों और उसकी सफलताओं का सजीव दस्तावेज़ है। लेखक की भाषा और विश्लेषण पाठक को अंत तक बाँधे रखते हैं।
यद्यपि पुस्तक में अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा की गई है, फिर भी मुझे लगा कि महिला मुद्दों और महिलाओं की भूमिका पर अपेक्षाकृत कम प्रकाश डाला गया है।
कुल मिलाकर, "भारत गांधी के बाद" स्वतंत्र भारत के इतिहास को समझने के इच्छुक प्रत्येक पाठक के लिए एक उत्कृष्ट और संग्रहणीय कृति है। यह केवल इतिहास नहीं पढ़ाती, बल्कि लोकतंत्र, राष्ट्र-निर्माण और समाज के विकास पर गंभीर चिंतन के लिए भी प्रेरित करती है।






Great Review ! Keep Writing.