सत्य की दिशा में (एक महान आत्मा) (लेखक : डॉ. स्वामी उदास)
संसार में मनुष्यों के अनेक स्वभाव होते हैं, परंतु भारत भूमि पर प्रेम, वात्सल्य और त्याग की अनेक मूर्तियाँ जन्म लेती हैं। ये शुद्ध आत्माएँ अपने कर्मों के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को प्रेरित करती हैं। जैसे रामायण में हनुमान जी ने श्रीराम की सेवा कर अमरत्व प्राप्त किया, वैसे ही माॅ व्रजरानी ने अपने गुरु पथिक जी महाराज की सेवा कर एक साधारण स्त्री से असाधारण बनकर अमरता प्राप्त की।
‘सत्य की दिशा में (एक महान आत्मा)’ पुस्तक माॅ व्रजरानी के असाधारण जीवन की प्रेरणादायक कथा है। उन्होंने एक सामान्य स्त्री की भांति जीवन प्रारंभ किया — छात्र जीवन में विद्यालय गईं, चित्रकला सीखी और समय आने पर शिक्षण कार्य भी किया। फिर दांपत्य जीवन में प्रवेश किया।
आप अपने गुरू पथिक जी महाराज, की सेवा में इतनी लीन हो गए कि आपने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया, पति का दूसरा विवाह कर आपने गुरु सेवा को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया।
आप अपने गुरु का अत्यधिक सम्मान करती थीं। एक बार जब गुरु ने सार्वजनिक मंच पर आपको डांटा, तब भी आप शांत रहीं — क्योंकि आप मान–अपमान से ऊपर उठ चुकी थीं। गुरुजी की सेवा से आपका साधारण जीवन दिव्य बन गया।
माॅ व्रजरानी कैंसर से पीड़ित होने के बावजूद शारीरिक कष्टों को मुस्कराकर सहती रहीं। उन्होंने शरीरांत के बाद भी अपने भक्तों का कल्याण किया। पथिक जी महाराज और परमहंस नागा निरंकारी जी महाराज के संरक्षण में आपने अपनी आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत विकास किया।
अपने प्रवचनों में आपने सदैव पुरुषार्थ पर बल दिया — कर्म, साहस और सेवा का अद्भुत संगम आपके जीवन में देखा गया। यह एक विहंगम, विलक्षण और पूजनीय जीवन यात्रा रही, जो आज भी असंख्य लोगों को प्रेरित करती है।
ऐसी पुण्य आत्मा को हम कोटि-कोटि प्रणाम करते हैं।






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