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हम खत्म करेगें (लेखक : मोहन मुक्त)

दीपक कुमार
Aug 27
2 min read

2024 मे दो किताब खरीदी, जिनके विमोचन का मैं साक्षी रहा, एक 'हिमांक और क्वथनांक के बीच' 23/5/24 ,

दूसरी 'हम खत्म करेगे' कविता संग्रह, मोहन मुक्त 1/9/24,


दोनो ही किताबों मे लेखक और कवि से ऑटोग्राफ भी लिए। संयोग से दोनो ही जनपद पिथौरागढ से सम्बन्ध भी रखते है।

'हम खत्म करेगें' को आज ही खत्म किया । 'हम खत्म करेगें' की कविता पढते समय जो जिज्ञासा शुरू मे आती है, उसका समाधान भी अन्त तक आते आते मिल जाता है।

मोहन मुक्त कहते हैं मेरी कविता मे सच है जो सच है, लेकिन जब वो कहते है लय नही है, कविता जैसा कुछ नही है तो झूठ है, जब पढना शुरू करते है तो लय भी मिल जाती है-


आधा ही सही मुझको सफर मे चाँद चाहिए।

मुक्त की कविता ने पुरानी कविता के बिंबो को तो पलटा ही पुराने और स्थापित कवियों को ललकारा भी है


उनसे जवाब भी मांगा है फिर चाहे वो अज्ञेय हो, गुमानी हो,या वर्तमान के स्थापित कवि 'महेश पुनेठा' सवाल सबसे पूछे है-' सांप ने कहा'। अज्ञेय की कविता 'सांप' का जवाब है।

'सडक तुम आई हो जब सब शहर चले गये'


पुनेठा जी की चर्चित कविता है, जिसमे मुक्त कवि से कह रहे है अपने सोचने का दायरा बढाओ

'कवि सडक देख लेता है

इंसान नहीं देखता।'


मुक्त की कविता हर वंचित का स्वर है स्त्री का भी और दलित का तो है ही,

अहिल्या अगर होगी तो जरूर आसमान मे तारा बनकर कह रही होगी मुक्त आज तूने समझा, तूने पूछा मेरे सवाल को जिसे मै भी आज तक सोचती रही कि पूछूँ कैसे 'अहल्या' ( हम खत्म करेगे पेज 208) मुक्त की रचना मे विद्रोह है, कुछ कविता लम्बी है जिसकी जरूरत भी है 'छोटे लाल की बीबी डराती हैं'

बचपन के दर्द को तो शब्द दिये ही है, अपने प्रेम को भी व्यक्त किया है- जब मै हो जाऊगा चुप, चुम्बनो का रंग कल्पना है या हकीकत मुक्त ही जाने। मुक्त कह रहे है 'जानता हूँ ये मेरी,जिन्दगी मे नही टूटेगा, लेकिन मै अपने हिस्से की चोट करूँगा " ।


कविता की समीक्षा एक बार पढकर करना जल्दबाजी होगी। मुक्त की कविता हर बार नया अर्थ देगी ऐसा मुझे लगता है।


'हम खत्म करेगें' 6 भागो में (' बिबं को पलटो, मै ही पहाड हूँ,,श्रम और सौन्दर्य,पुरुष देह में कैद, मेरी लडाई आजादी की, जब्तशुदा )है। जिन्हे पढकर ही जाना जा सकता है समझा जा सकता है जैसे कालिंदीखाल की यात्रा का रोमांच उस यात्रा मै जाकर ही महसूस किया जा सकता है।


मोहन मुक्त की कविता साफ कहती है - मुझे पढो और समझो


'किसी के लिए मत लिखो अपने हिस्से का सच लिखो।'


सच का सामना करने के लिए और सच के प्रति उत्तर के लिए संभावना प्रकाशन से प्रकाशित 'हम खत्म करेगे को ' को पढना जरूरी है तभी जान पायेगे सांप , कुतिया, माॅ,बहन, फुल, तारा, फरवरी- नवम्बर , और प्रेम का अर्थ।

 
 
 

1 Comment

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Guest
Sep 05
Rated 5 out of 5 stars.

बहुत अच्छी समीक्षा है।

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